समाज भवन में पहली बार आयोजन बृहद पैमाने पर किया गया
समाज की महिला विंग ने किया आयोजन .

जगदलपुर । उड़िसा और उत्कल वासियों के पारंपरिक सभ्यता और संस्कृति का प्रमुख पर्व “रजो संक्राति ” को बस्तर जिले की उत्कल समाज की महिलाओं ने समाज भवन में पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया । दो दिनों तक हुए कार्यक्रम पर उत्कल समाज महिला विंग की अध्यक्षा शुभ्रा दास ने बताया कि 2 दिनों तक चले इस आयोजन में नृत्य संगीत खेल सहित आनंद मेला का आयोजन किया गया । जिससे बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने भाग लेकर इसे सफल बनाया ।कार्यक्रम में आए महिलाओं का स्वागत सिंदूर से मांग भरकर चूड़ियां भेंट कर किया गया

।वहीं महिला विंग की सचिव निरुपमा दास ने बताया कि आज के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने भाग लिया । सभी के सहभागिता और उत्साह भरे माहौल में सभी ने एक दूसरे को बधाइयां दी और पारंपरिक खेलकूद में भाग लिया । और विशेष झूले का आनंद लिया ।
महिलाओं की सहभागिता से आज का कार्यक्रम सफल रहा ।कार्यक्रम के उपरांत विजेता महिलाओं को समाज की वरिष्ठ महिला सदस्यों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए ।
इस दौरान महिलाओं को विशेष उपहार सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव के द्वारा भेंट किया गया था ।
जिसे समाज के सचिव सुमित महापात्र के द्वारा दिया गया ।

इस अवसर समाज की वरिष्ठ सदस्या एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका उर्मिला आचार्य ने रजो संक्रांति पर्व को मानने के संदर्भ में बताया बारिश की पहली फुहार जब भू देवी पर पड़ती है तो उससे सृष्टि सृजन की पहली खुशबू महकती है ।इसी प्रकार ईश्वर की कृति के अनुसार महिलाएं भी मासिक धर्म के साथ रजस्वला होती है ,जो यह दर्शाती है की मनुष्य और प्रकृति और एक दूसरे के कितने निकट है।
संक्रांति पर इसका विशेष महत्व है महिलाएं आज के इस दिन पर खूब आनंद के साथ गीत संगीत नृत्य और रुचिकर जीवन का आनंद लेती है ।साथ ही उन्होंने बताया उड़िया संस्कृति में इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है ।
समाज की वरिष्ठ सदस्य सुषमा सामंत झा ने समस्त मात्र शक्तियों को बधाई दी और कहा कि आज के दिन सभी समाज की महिलाओं ने एकजुटता के साथ इस पर्व को मनाया ,आनंद और उल्लास का अनुभव हुआ ।
वरिष्ठ सदस्या प्रवीणा पाणिग्रही ने उत्कल समाज द्वारा आयोजित रजो संक्रांति पर्व पर समाज के द्वारा किए गए कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में परस्पर एक-दूसरे और संबंधों को प्रगाढ़ता प्रदान करने में सहायक होते हैं ।आयोजन कर्ताओं को बधाई दी,
साथ ही उन्होंने कहा पर्व का संबंध मां कामाख्या देवी के साथ बताया और कहा कि मां कामाख्या देवी वर्ष में एक बार रजस्वला होती है । आज के वर्तमान दौर मे भी शाश्वत सत्य के साथ तीन दिन तक देवी के अंग वस्त्र लाल रंग से सराबोर हो जाते हैं ।
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आज के कार्यक्रम में पारंपरिक खेलों में विजेता महिलाओं को पुरस्कार वितरित किया गया साथ ही श्रीमती प्रिंसेस का खिताब भी दिया गया ।
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सुकमा जमींदार परिवार के कुमार जयदेव द्वारा रजो संक्रांति पर्व पर समाज की महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कर सभी को उपहार भेंट किए ।
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