बस्तर जिले में निजी स्कूलों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। कई स्कूलों में फीस जमा नहीं होने के कारण छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका जा रहा है, उनका रिजल्ट रोक दिया जा रहा है और टी.सी. भी नहीं दी जा रही है। इस कारण कई बच्चों को अपने सहपाठियों के सामने अपमानित होना पड़ रहा है, जिससे उनके मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर NSUI ने कड़ा विरोध जताया है। NSUI जिला अध्यक्ष विशाल खम्बारी ने कहा कि शिक्षा के नाम पर इस प्रकार का व्यवहार पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है। निजी स्कूलों को यह समझना चाहिए कि वे बच्चों का भविष्य बनाने के लिए हैं, न कि फीस के दबाव में उन्हें शिक्षा से वंचित करने के लिए।
उन्होंने कहा कि फीस के कारण छात्रों को परीक्षा देने से रोकना, रिजल्ट रोकना या टी.सी. रोकना सीधे-सीधे शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।*बस्तर जिले के अनेक निजी स्कूलों से इस प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।NSUI ऐसे मामलों को लेकर लगातार छात्रों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
NSUI ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से मांग की है कि जिन भी स्कूलों में इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं, उन्हें तत्काल संज्ञान में लिया जाए, उनकी पूरी जानकारी एकत्रित कर जांच की जाए और दोषी संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र का रिजल्ट या टी.सी. रोका न जाए और सभी बच्चों को बिना भेदभाव के उनका शैक्षणिक अधिकार प्राप्त हो सके।
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