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रामनवमी पर गाजे-बाजे के साथ गुप्ता समाज की भव्य शोभायात्रा, राम दरबार की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

माई दंतेश्वरी मंदिर से निकली शोभायात्रा, शहर में दिखा धार्मिक उत्साह का माहौल
जगदलपुर। रामनवमी के पावन अवसर पर बस्तर जिला गुप्ता समाज द्वारा गाजे-बाजे, डीजे और नृत्य-संगीत के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का शुभारंभ माई दंतेश्वरी मंदिर परिसर से हुआ, जो शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।


राम दरबार की झांकी बनी मुख्य आकर्षण, बच्चों की प्रस्तुति ने जीता मन
शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूप में सजे छोटे-छोटे बच्चों की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। राम दरबार की आकर्षक झांकी आयोजन का मुख्य केंद्र रही, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़े और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।


समाज के सभी वर्गों की सहभागिता, एकता और उत्साह का दिखा अद्भुत संगम
इस आयोजन में गुप्ता समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं के साथ बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने शोभायात्रा को और भव्य बना दिया। समाज के लोगों में भगवान श्रीराम के प्रति आस्था और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।


शोभायात्रा मार्ग में भंडारे की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण
शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया गया, जहां हलवा, पूरी, सब्जी के साथ आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक की व्यवस्था भी की गई थी। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन का आनंद लिया और समाज के इस प्रयास की सराहना की।


भक्ति और संस्कृति का संदेश देते हुए संपन्न हुआ आयोजन
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक भक्ति के साथ सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। शोभायात्रा के माध्यम से समाज ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और एकता का संदेश दिया। आयोजन ने शहर में आपसी सौहार्द और धार्मिक समरसता को भी मजबूत किया।


समाज के पदाधिकारियों ने मीडिया से साझा किया आयोजन का उद्देश्य
समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य समाज में एकता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि रामनवमी के अवसर पर निकाली गई यह शोभायात्रा आने वाली पीढ़ियों को भी अपने संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करती है।