वार्षिक परंपरा के तहत नगरनार ग्राम पंचायत में ऐतिहासिक मेले के आयोजन की रूपरेखा तय
नगरनार, 2026: प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्राम पंचायत नगरनार में ऐतिहासिक वार्षिक मेले (चैत्र मंडाई) का आयोजन किया जाएगा। इस पारंपरिक आयोजन को लेकर गांव में उत्साह का माहौल है, और ग्रामीण स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।
सर्वसम्मति से मंडाई समिति का गठन, विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां सौंपी गईं
आज आयोजित बैठक में ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचगण, जनपद सदस्य तथा गांव के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से मंडाई समिति का गठन किया गया। इस दौरान आयोजन के सुचारु संचालन हेतु पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिससे पूरे महोत्सव की व्यवस्था सुव्यवस्थित रूप से की जा सके।
समिति पदाधिकारियों की नियुक्ति, आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई
गठित समिति में अध्यक्ष के रूप में श्री घनश्याम सेठिया, उपाध्यक्ष श्री जलंधर नाग, कोषाध्यक्ष श्री रैनू बघेल तथा सचिव श्री रविशंकर दास को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा संरक्षण सदस्य के रूप में उमाकांतों, भानो, डोमू सिरहा, मुन्ना बेसरा, धनर पटेल, सम्भू कश्यप, बलि सेठिया, सामशन कश्यप, धनपति सिरहा, विनोद, मन्नु सहित गांव के अन्य युवाओं को भी शामिल किया गया है, ताकि आयोजन को भव्य और सफल बनाया जा सके।
तीन जनवरी को होगा भव्य आयोजन, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा उत्सव
समिति के अध्यक्ष घनश्याम सेठिया के अनुसार, सर्वसम्मति से यह तय किया गया है कि आगामी चैत्र मंडाई महोत्सव शुक्रवार, 3 जनवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
बस्तर के राजा का आगमन, देवी भंडारनी की पूजा और भव्य रथ यात्रा प्रमुख आकर्षण
महोत्सव के दौरान विशेष रूप से बस्तर के राजा को आमंत्रित किया जाता है। उनके आगमन के पश्चात गांव की देवी माँ भंडारनी की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद देवी की छत्र एवं बस्तर के राजा को फूलों से सुसज्जित रथ में बैठाकर पूरे मेले की परिक्रमा कराई जाती है। यह रथ यात्रा इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां, आदिवासी नृत्य और रात्रि नाट का रहेगा विशेष आकर्षण
मेले के दौरान विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाती हैं, जिनमें झांकियां, आदिवासी नृत्य, बैंड-बाजा और अन्य पारंपरिक प्रदर्शन शामिल रहते हैं। साथ ही मीना बाजार, झूले और रात्रि नाट (नाटक) का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे ग्रामीण एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह महोत्सव मनोरंजन और सांस्कृतिक समृद्धि का केंद्र बनेगा।
यह चैत्र मंडाई महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है, बल्कि ग्रामीण समाज में एकता, सहयोग और उत्सव की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
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