डाइट बस्तर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर, कोंडागांव और बस्तर के 35 शिक्षक हुए शामिल
जगदलपुर, 20 मार्च 2026। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बस्तर में पीएमश्री स्कूलों के शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में कोंडागांव और बस्तर जिले के कुल 35 शिक्षक प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार करना रहा।
कार्यशाला का शुभारंभ, पीएमश्री योजना और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर दिया गया जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ डाइट संस्थान के प्राचार्य नितिन डडसेना द्वारा किया गया। उन्होंने पीएमश्री योजना की अवधारणा और उसके दीर्घकालिक उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे अन्य विद्यालय भी प्रेरित होकर शिक्षा के स्तर में सुधार कर सकें।
विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर साझा किए अनुभव, शिक्षकों को मिला व्यवहारिक मार्गदर्शन
प्रशिक्षण सत्रों के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। संध्या श्रीवास्तव ने नेतृत्व, प्रबंधन और अनुभव आधारित शिक्षा पर मार्गदर्शन दिया। सतीश शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, जबकि तनय घोष ने पुस्तकालय प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया। विश्वमोहन मिश्रा ने पीएमश्री योजना के प्रमुख स्तंभों और विद्यालयी वातावरण निर्माण पर विस्तार से जानकारी दी।
नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा पर विशेष सत्र, तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर जोर
घनश्याम यादव ने नई शिक्षा नीति, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा और शिक्षा के अधिकार जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अंजलि यादव ने शैक्षिक तकनीक के उपयोग की जानकारी दी। वहीं स्नेहलता बंजारी ने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में दक्षता निर्माण पर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन, आधुनिक शिक्षण को बढ़ावा देने की पहल
पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संयोजन डाइट बस्तर के पीएमश्री प्रभारी चंद्रकांत पानीग्राही द्वारा किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नीतियों से सुसज्जित करना है, ताकि वे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान कर सकें।
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