हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित माओवादी, मैराथन में नई दिशा का प्रदर्शन
जगदलपुर, 20 मार्च 2026। बस्तर की शांत वादियों में इस बार बदलाव और विकास की एक नई और सकारात्मक तस्वीर उभरने जा रही है। आगामी 22 मार्च को आयोजित होने वाली बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक परिवर्तन और पुनर्वास की सफल कहानी का प्रतीक बनने जा रही है। इस आयोजन में उन पुनर्वासित माओवादियों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है।
पूनामारगेम और लोन वर्राटू से मुख्यधारा में वापसी, अब खेल के मैदान में नई पहचान
दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू अभियान और पूना मारगेम जैसे पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से कई पूर्व माओवादी अब सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं। ये युवा अब जंगलों की कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़कर खेल और फिटनेस के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। मैराथन की तैयारी में जुटे ये प्रतिभागी अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मैदानों में चल रहा अभ्यास, प्रशिक्षकों की निगरानी में निखर रही क्षमता
अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का उत्साह और समर्पण देखने लायक है। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में वे आधुनिक रनिंग तकनीकों और फिटनेस ट्रेनिंग के माध्यम से अपनी क्षमता को निखार रहे हैं। उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और आंखों में भविष्य के सपनों की चमक यह दर्शाती है कि वे अब एक नई शुरुआत के लिए तैयार हैं।
महिलाओं में भी बढ़ा आत्मविश्वास, सम्मान और सुरक्षा का अनुभव
शिविरों में शामिल महिला प्रतिभागियों ने भी सकारात्मक बदलाव का अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि अब वे डर और असुरक्षा के माहौल से निकलकर सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की ओर बढ़ रही हैं। यह पहल उन्हें खेल के माध्यम से अवसर देने के साथ समाज में नई पहचान भी दिला रही है।
विभिन्न श्रेणियों में आयोजन, 42 किमी से फन रन तक शामिल
इस आयोजन में 42 किलोमीटर की फुल मैराथन के साथ 21 किलोमीटर हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की फन रन जैसी विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं। बस्तर संभाग के सातों जिलों से आए प्रतिभागी, स्थानीय नागरिक, युवा और छात्र-छात्राएं इस आयोजन में हिस्सा लेकर इसे एक व्यापक और समावेशी रूप दे रहे हैं।
बड़ी भागीदारी, शांति और विकास का मजबूत संदेश
इस मैराथन में 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर भाग ले रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब हिंसा से हटकर विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनकी भागीदारी यह संदेश देती है कि सही अवसर मिलने पर हर व्यक्ति समाज के विकास में योगदान दे सकता है।
पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा, बस्तर की नई छवि
इस मैराथन का उद्देश्य बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। लालबाग मैदान से शुरू होकर चित्रकोट जलप्रपात तक की यह दौड़ बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सामाजिक बदलाव दोनों को दर्शाएगी।
निःशुल्क पंजीयन और पुरस्कार राशि से उत्साह
स्थानीय प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क पंजीयन की सुविधा और कुल 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि ने इस आयोजन को और आकर्षक बना दिया है। विभिन्न श्रेणियों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है।
बस्तर में बदलाव का प्रतीक बनेगी मैराथन
22 मार्च को आयोजित होने वाली यह मैराथन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि बस्तर के नए भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह आयोजन शांति, विश्वास और विकास का संदेश देते हुए बस्तर के बदलते स्वरूप को प्रदर्शित करेगा।
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