बुजुर्गों और माताओं के लिए बैंक अब उनके घर पर
जगदलपुर, 17 मार्च 2026। पहले बस्तर के वनांचलों में बुजुर्गों को अपनी पेंशन और गर्भवती माताओं को मातृत्व वंदन योजना की राशि के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। शारीरिक अक्षमता और दूरस्थ बैंकिंग सुविधाओं के अभाव में यह संघर्ष ग्रामीण जीवन का कड़वा सच था।
लेकिन आज वही गांव डिजिटल क्रांति और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से बदल चुका है। बीसी सखियों ने सेवा और ममता के हाथ बढ़ाते हुए ग्रामीण बैंकिंग के इस मानवीय चेहरे को जीवंत कर दिया है। अब वृद्ध और असमर्थ लोग घर बैठे ही बैंकिंग सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

छिदगांव में रतन राम बघेल की कहानी
छिदगांव के वृद्ध रतन राम बघेल जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, अब हर महीने बीसी सखी दशोमती कश्यप के माध्यम से अपनी पेंशन सीधे अपने घर पर प्राप्त कर रहे हैं। रतन राम बघेल कहते हैं:
“बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण बैंक जाना मेरे लिए संभव नहीं था। अब दशोमती बेटी हर महीने पैसे दे जाती है, जिससे मुझे बहुत सहारा मिला है।”

महिला शक्ति और डिजिटल इंडिया का सशक्त चेहरा
जगदलपुर जिले की 144 बीसी सखियों ने फरवरी महीने में 4 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर दिखाया कि महिलाओं को अवसर और तकनीक मिलने पर वे पूरी अर्थव्यवस्था बदल सकती हैं।
इन सखियों ने:
- पेंशन का वितरण
- नरेगा मजदूरों की मजदूरी भुगतान
- मातृत्व वंदन योजना के तहत 67 लाख रुपये से अधिक राशि गर्भवती और धात्री माताओं तक पहुँचाना
- स्वास्थ्य और पोषण में बड़ा योगदान
सभी सेवाएँ गाँव में ही सुरक्षित तरीके से प्रदान की जा रही हैं।
महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण
दरभा और बस्तर जैसे ब्लॉकों में बीसी सखियों ने दिन-रात मेहनत कर हजारों ट्रांजैक्शन किए। लोहंडीगुड़ा और तोकापाल में भी लाखों रुपये का प्रबंधन इनकी कुशलता से हुआ।
यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि 144 महिला शक्तियों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की कहानी है। बस्तर की ये बेटियाँ डिजिटल इंडिया का असली चेहरा हैं, जो गाँवों के विकास का नेतृत्व कर रही हैं।
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