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24 साल बाद बिलासपुर गोलीकांड में HC का बड़ा फैसला! आरोपियों की दोषसिद्धि बरकरार, हत्या और घर में घुसकर हमला साबित

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगभग 24 साल पुराने बिलासपुर गोलीकांड मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपियों को हत्या के प्रयास और घर में घुसकर हमला करने के मामले में दोषी ठहराने के फैसले को सही माना है।

Bilaspur Firing Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने करीब 24 साल पुराने बिलासपुर गोलीकांड मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी है।

इस मामले में मुख्य आरोपी रामकृष्ण वैश्य उर्फ छोटू (Ramkrishna Vaishya alias Chhotu) और अन्य आरोपियों को हत्या के प्रयास और घर में घुसकर हमला करने का दोषी माना गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी।

2001 में हुई थी वारदात

यह घटना 29 अक्टूबर 2001 की रात की है। बिलासपुर के कश्यप कॉलोनी (Kashyap Colony Bilaspur) में रहने वाली सुनीता तिवारी (Sunita Tiwari) अपने घर में सुच्चानंद वाधवानी (Succhanand Wadhwani) के साथ चाय पी रही थीं।

इसी दौरान आरोपी रामकृष्ण वैश्य अपने साथियों के साथ घर में घुस आया। घर से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोपी ने देशी कट्टे से गोली चला दी।

गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुई पीड़िता

गोली सीधे सुनीता तिवारी को लगी। गोली उनके पेट और जांघ के पास जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उनके शरीर से गोली और कई छर्रे निकाले। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

पुलिस जांच के बाद अदालत में पेश हुआ चालान

घटना के बाद सिटी कोतवाली थाना बिलासपुर (City Kotwali Police Station Bilaspur) में हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया।

पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और धारा 450 सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया।

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों को माना मजबूत

आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता के बयान, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही, डॉक्टरों की रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया।

अदालत ने माना कि पीड़िता के शरीर से गोली और छर्रे निकलना और मेडिकल रिपोर्ट से गोली चलने की पुष्टि होना इस बात का मजबूत प्रमाण है कि आरोपियों ने जानलेवा हमला किया था।

साझा मंशा भी साबित

अदालत ने यह भी माना कि आरोपी एक साथ घर में घुसे और घटना को अंजाम दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सभी की साझा मंशा थी। इसी आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 34 के तहत सभी आरोपियों की जिम्मेदारी तय करना सही माना।

हालांकि लंबे समय के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके संबंध में अपील समाप्त मानी गई। लेकिन मुख्य आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।