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पत्रकार के परिवार पर ‘गलत धाराओं’ का आरोप: गीदम प्रकरण को लेकर जगदलपुर में पत्रकारों का मौन धरना, न्यायिक जांच की मांग तेज

गीदम में पत्रकार के परिवार के खिलाफ कार्रवाई से भड़का आक्रोश, जगदलपुर में पत्रकारों का विरोध प्रदर्शन

जगदलपुर। दंतेवाड़ा जिले के गीदम में पत्रकार के परिवार से जुड़े एक मामले में पुलिस द्वारा कथित तौर पर गलत धाराओं में कार्रवाई किए जाने के विरोध में बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में पत्रकारों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। बस्तर जिला पत्रकार संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने मौन धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


ट्रैक्टर से टक्कर की घटना के बाद विवाद, पत्रकार ने दी थी शिकायत

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 6 मार्च को गीदम में पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के सामने एक ट्रैक्टर चालक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। इस घटना में पत्रकार के पिता और उनकी दो वर्ष की बेटी को ट्रैक्टर से दबाने की कोशिश की गई, हालांकि दोनों बाल-बाल बच गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद जब पत्रकार मौके पर पहुंचे तो ट्रैक्टर चालक के साथ उनका विवाद हुआ, जिसके बाद उन्होंने गीदम थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।


एफआईआर दर्ज करने के बजाय पत्रकार और परिवार पर गंभीर धाराएं लगाने का आरोप

पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने पत्रकार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय उल्टा ट्रैक्टर चालक और उसके सहयोगियों के दबाव में आकर पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके माता-पिता के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। आरोप यह भी है कि बिना समुचित जांच के पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।


कमिश्नर कार्यालय के सामने मौन धरना, बड़ी संख्या में पत्रकार हुए शामिल

इस कार्रवाई के विरोध में बस्तर जिला पत्रकार संघ के नेतृत्व में पत्रकारों ने जगदलपुर स्थित कमिश्नर कार्यालय के सामने मौन धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पूरे पत्रकार समुदाय में आक्रोश का माहौल है।


पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग, निष्पक्ष विवेचना की अपील

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पत्रकार और उनके माता-पिता के खिलाफ लगाए गए आरोपों में गंभीर संदेह है। ऐसे में पूरे मामले की न्यायिक जांच कराकर निष्पक्ष विवेचना की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो सके।