आरोपों से घिरे थाना प्रभारी की कार्यशैली पर प्रकाशित खबर के बाद अचानक बदला रुख, पत्रकार को थाने बुलाकर स्पष्टीकरण मांगने से मचा विवाद
बलरामपुर | बसंतपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और पत्रकारिता के बीच टकराव का एक गंभीर मामला सामने आया है। हाल ही में थाना प्रभारी की कार्यशैली और उन पर लगे आरोपों को लेकर प्रकाशित एक समाचार के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने या जांच की पहल करने के बजाय संबंधित थाना प्रभारी द्वारा खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को ही नोटिस जारी कर दिया गया है। इस कदम को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

चोरी के मामले में मुख्य आरोपियों को छोड़ने और कथित अवैध वसूली की खबर के बाद क्षेत्र में तेज हुई चर्चाएं
दरअसल, हाल ही में प्रकाशित एक समाचार में बसंतपुर थाना प्रभारी पर यह आरोप लगाया गया था कि चोरी के एक मामले में मुख्य आरोपियों को छोड़ दिया गया और मामले के निपटारे के नाम पर कथित तौर पर अवैध वसूली की गई। खबर सामने आने के बाद थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई और कई लोगों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई।

खबर से नाराज थाना प्रभारी ने पत्रकार को भेजा नोटिस, तीन दिनों में थाने में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश
इसी खबर के प्रसारण से नाराज होकर बसंतपुर थाना प्रभारी द्वारा पत्रकार रामहरी गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि भारत सम्मान चैनल और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित समाचार असत्य एवं भ्रामक है, जिससे एक शासकीय सेवक की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची है। नोटिस में पत्रकार को तीन दिनों के भीतर थाना बसंतपुर में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
जिस अधिकारी पर लगे आरोप, वही कर रहे कार्रवाई — निष्पक्षता और प्रक्रिया को लेकर उठने लगे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, वही अधिकारी स्वयं नोटिस जारी कर कार्रवाई कर रहे हैं। कानूनी जानकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी समाचार को गलत या भ्रामक माना जा रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच उच्च अधिकारियों द्वारा कराई जानी चाहिए। सीधे तौर पर पत्रकार को नोटिस भेजना कई लोगों को उचित प्रक्रिया से हटकर कदम प्रतीत हो रहा है।
पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता, कहा — तथ्य से जवाब देना चाहिए, दबाव से नहीं
इस मामले को लेकर पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि किसी खबर में तथ्यात्मक त्रुटि है तो उसका जवाब तथ्यों और आधिकारिक जांच के माध्यम से दिया जाना चाहिए। नोटिस जारी कर पत्रकारों को डराने या दबाव बनाने की कोशिश लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए सकारात्मक संकेत नहीं मानी जा सकती।
अब उच्च पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर टिकी निगाहें, क्या होगी निष्पक्ष जांच या नोटिस तक ही सीमित रहेगा मामला
स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि समाचार गलत है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता स्पष्ट की जाए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय की जाए। फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उच्च पुलिस अधिकारी इस घटनाक्रम को किस तरह लेते हैं और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या फिर मामला केवल नोटिस की कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है।
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