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मुख्यमंत्री के आदर्श ग्राम दावों पर श्यामकुमारी ध्रुव का सवाल: पंचायतों को अधिकार और राशि दिए बिना कैसे होंगे आदर्श ग्राम?

पूर्व सरपंच संघ प्रदेश उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता श्यामकुमारी ध्रुव ने पंचायत विकास पर मुख्यमंत्री के बयानों पर उठाए सवाल

सक्ती। छत्तीसगढ़ की पूर्व सरपंच संघ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी सचिव श्यामकुमारी ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आदर्श ग्राम बनाने के दावों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को अधिकार और आर्थिक संसाधन दिए बिना केवल बैठकों और सोशल मीडिया के जरिए आदर्श ग्राम बनाने की बातें करना वास्तविकता से दूर है।

मुख्यमंत्री से सरपंचों की मुलाकात और आदर्श ग्राम बनाने का दावा

श्रीमती ध्रुव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा भवन स्थित कार्यालय में जशपुर जिले से चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर आए सरपंचों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की धुरी हैं। उन्होंने सरपंचों को सलाह दी कि समर्पण और जज्बे से गांवों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और अध्ययन भ्रमण से मिली सीख को अपने-अपने गांवों में लागू कर आदर्श ग्राम बनाने का प्रयास करें।

समग्र संवाद की आवश्यकता, सिर्फ जशपुर तक सीमित नहीं होना चाहिए

प्रदेश कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इसी तरह छत्तीसगढ़ के सभी जिलों और ब्लॉकों के सरपंचों से संवाद करें तो यह स्वागत योग्य कदम होगा। केवल अपने गृह जिला जशपुर तक सीमित रहकर आदर्श ग्राम बनाने की बातें करना पर्याप्त नहीं है।

15वीं वित्त आयोग की राशि न मिलने से विकास कार्य प्रभावित

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा शासन में ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की स्वीकृति नहीं दी जा रही है और न ही नए कार्यों की मंजूरी देने की पहल दिखाई दे रही है। पंचायतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण 15वीं वित्त आयोग की राशि भी अभी तक पंचायतों के खातों में जारी नहीं की गई है, जिससे गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री से सवाल, पंचायतों के साथ भेदभाव क्यों?

श्यामकुमारी ध्रुव ने कहा कि जब पंचायतों को अधिकार और संसाधन नहीं दिए जा रहे, तो केवल आदर्श ग्राम बनाने की बातें करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि आप स्वयं पंच और सरपंच से लेकर मुख्यमंत्री तक की अपनी यात्रा पर गर्व व्यक्त करते हैं, लेकिन आज वही पंचायतें संसाधनों और अधिकारों के अभाव में संघर्ष कर रही हैं। ऐसी कौन-सी परेशानी है कि पंचायतों के साथ इस प्रकार का भेदभाव किया जा रहा है?

समान व्यवहार और ठोस कदम उठाने की अपील

श्रीमती ध्रुव ने कहा कि मुख्यमंत्री एक आदिवासी नेता होने के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन्हें सभी जिलों और सभी सरपंचों के साथ समान व्यवहार करते हुए पंचायतों को मजबूत बनाने के ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।