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बस्तर की महिलाओं के लिए ‘सखी’ बनी सुरक्षा का मज़बूत कवच — संकट और हिंसा में सहारा बनी वन स्टॉप सेंटर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष रिपोर्ट: महिलाओं को बहुआयामी सहायता का केंद्र

जगदलपुर, 6 मार्च 2026। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहां दुनिया भर में महिला सशक्तिकरण की चर्चाएँ हो रही हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जगदलपुर में संचालित ‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर ने संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता पहुंचाने में मिसाल कायम की है। योजना के प्रारंभ से लेकर 31 जनवरी 2026 तक कुल 1862 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 1849 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।


मानसिक परामर्श और सुरक्षित आश्रय: महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद

केंद्र द्वारा दी जाने वाली बहुआयामी सहायता के आंकड़े बताते हैं कि 1225 महिलाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) के माध्यम से मानसिक तनाव से उबारा गया और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया। साथ ही, संकट के समय 763 महिलाओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई।


विधिक, पुलिस और चिकित्सा सहायता में सक्रिय भूमिका

विधिक सहायता के क्षेत्र में केंद्र ने 471 महिलाओं को कानूनी न्याय दिलाने में मदद की, जबकि 84 महिलाओं को पुलिस सहायता और 42 महिलाओं को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।


2026 की शुरुआत भी रही सक्रिय: जनवरी माह के आंकड़े

साल 2026 की शुरुआत में अकेले जनवरी माह के दौरान 42 नए मामले सामने आए, जिनमें से 35 प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया गया। इस महीने में 8 महिलाओं को परामर्श, 8 को सुरक्षित आश्रय, और 4 को कानूनी सहायता प्रदान की गई।


‘सखी’ का संदेश: बस्तर की महिलाओं के लिए स्थायी सहारा

आज यह केंद्र बस्तर की महिलाओं के लिए एक सखी की भूमिका निभा रहा है, जो कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह रिपोर्ट न केवल विभाग की सजगता को दर्शाती है, बल्कि बस्तर की उन महिलाओं के साहस को भी सलाम करती है जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर ‘सखी’ का हाथ थामा