शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत पिछले 13 वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं होने के विरोध में मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दायर याचिका तक पहुंचा। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार को 6 महीने के भीतर मांगों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

क्या है मांग?
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग की है। प्रस्तावित वृद्धि इस प्रकार है:
प्राथमिक कक्षा: 7000 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये प्रति छात्र
माध्यमिक कक्षा: 11500 रुपये से बढ़ाकर 22000 रुपये प्रति छात्र
हाई स्कूल / हायर सेकेंडरी: 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये प्रति छात्र

अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
इसी क्रम में बस्तर जिला के निजी स्कूल प्रबंधकीय संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त संचालक शिक्षा और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं की जाती, तो आंदोलन जारी रहेगा।

असहयोग आंदोलन की घोषणा
निजी स्कूल प्रबंधकीय संगठन के सचिव नीलोत्पल दत्ता ने जानकारी दी कि असहयोग आंदोलन के तहत:
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यों में सहयोग नहीं किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल प्राचार्य के किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब नहीं दिया जाएगा।
यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं की जाती।
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और संचालन लागत को देखते हुए वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि अपर्याप्त है, इसलिए इसमें यथोचित संशोधन आवश्यक है।
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