ग्राम सदगुढ़ में विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आदरणीय श्री गोविंद नारायण जांगड़े, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जगदलपुर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जगदलपुर द्वारा बस्तर सामाजिक जन विकास समिति के सहयोग से किया गया। उक्त समिति के सचिव डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय की विशेष सहभागिता एवं सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सुश्री अंकिता कश्यप, सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जगदलपुर रहीं। अपने मुख्य उद्बोधन में उन्होंने सामाजिक न्याय की अवधारणा को प्रकृति और नैतिकता से जोड़ते हुए कहा कि न्याय केवल कानून की पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार और सोच में भी प्रतिबिंबित होना चाहिए।

उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि प्राचीन काल से ही न्याय को संतुलन और सामंजस्य के रूप में देखा गया है। जैसे प्रकृति संतुलन बनाए रखती है, वैसे ही समाज में भी संतुलन आवश्यक है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तब गरीबी, अशिक्षा और असमानता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युग में न्याय का स्वरूप कानून, संविधान और व्यवस्था से जुड़ गया है। संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण, समान अवसर, शिक्षा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण सामाजिक न्याय के प्रमुख आधार हैं। संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो हमारे लोकतंत्र की नींव है।
अपने उद्द्बोधन में उन्होंने महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब बेटियों शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी समाज सशक्त होगा।
अनुसूचित जाति, जनजाति, महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों को समान अवसर प्रदान करना सामाजिक न्याय की मूल भावना है।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर नागरिक बनने के लिए शिक्षा ग्रहण करें। सामाजिक न्याय केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों को विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता एवं सामाजिक न्याय से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि ऐसा समाज निर्मित किया जाए जहाँ कोई भूखा न सोए, कोई अशिक्षित न रहे, कोई अपमानित न हो और कोई भी विकास की दौड़ में पीछे न छूटे।
कार्यक्रम में ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों, समिति के सदस्यों, खुला आश्रय गृह के अधीक्षक सीयाराम नेताम एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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