सरकार ने आयुर्वेद में इलाज करने वाले मरीजों को बड़ी राहत दी है। अब आयुर्वेद में इलाज का खर्चा भी बीमा कंपनियों को उठाना होगा। इसके लिए आयुर्वेद को स्वास्थ्य बीमा इकोसिस्टम की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) के साथ साझा समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते के साथ, एआईआईए को जीआईसी के तहत सभी 32 जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की सूची में सम्मिलित कर दिया गया है, जिससे मरीजों को योग्य आयुर्वेद-आधारित सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
32 बीमा कंपनियों के तहत कैशलेस उपचार सेवा
इस अवसर पर, एआईआईए के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने कहा कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के साथ, एआईआईए सामान्य बीमा परिषद से जुड़ी सभी 32 बीमा कंपनियों के तहत कैशलेस उपचार सेवाएं प्रदान करने योग्य हो गया है। उन्होंने आयुष मंत्रालय और पूरी एआईआईए टीम के निरंतर प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि इस पहल से आयुर्वेद-आधारित स्वास्थ्य सेवा में पहुंच, सामर्थ्य और विश्वास में सुधार होगा और रोगियों को काफी लाभ मिलेगा।
एआईआईए टीम को बधाई देते हुए, आयुष स्वास्थ्य बीमा पर विशेषज्ञों के कोर समूह के अध्यक्ष प्रोफेसर बेजोन कुमार मिश्रा ने कहा कि कैशलेस इलाज की सुविधाओं से मरीजों का भरोसा बढ़ेगा, ज्यादा लोगों तक पहुंच बढ़ेगी, संस्थागत विश्वसनीयता मजबूत होगी, मरीजों की संख्या बढ़ेगी और आयुष सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर वृद्धि होगी।
आयुष हेल्थ इंश्योरेंस हेल्पलाइन
इस मौके पर, प्रो. मिश्रा ने आयुष इलाज के लिए इंश्योरेंस से जुड़ी मदद को आसान बनाने के मकसद से आयुष मंत्रालय की आयुष हेल्थ इंश्योरेंस हेल्पलाइन की भी जानकारी दी।
हेल्पलाइन नंबर: 1800-11-0008
समय: सभी कार्य दिवसों में सुबह 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक
इस हेल्पलाइन का मकसद हकदार बीमा लाभार्थी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और बीमा-समर्थित आयुष हेल्थकेयर को बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा देना है।
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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एआईआईए)
एआईआईए, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, आयुर्वेद का सबसे बड़ा संस्थान है। यह पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तरक्की के बीच तालमेल स्थापित करता है। संस्थान कई विषयों में पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट प्रोग्राम देता है और आयुर्वेदिक दवाओं के अनुसंधान, विकास, मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मूल्यांकन और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण में सक्रिय रूप से लगा हुआ है।
रेफरल हॉस्पिटल: 200 बिस्तर
फैसिलिटीज: 25 स्पेशलिटी डिपार्टमेंट, 12 क्लिनिकल यूनिट, 8 इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च लैब
अन्य सुविधाएं: इंटरनेशनल कोलैबोरेटिव सेंटर, एडवांस्ड पेशेंट केयर, टीचिंग और रिसर्च
जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी)
जीआईसी एक कानूनी संस्था है, जिसे इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के सेक्शन 64सी के तहत बनाया गया। यह 2001 से इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के अंतर्गत काम कर रही है। काउंसिल तेजी से बदलते बीमा माहौल में लोगों के हितों की रक्षा करते हुए उद्योग के तरीकों को नियंत्रित और सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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