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पर्यावरण संरक्षण एवं शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में मनीष कुमार अहीर को मिला पर्यावरण मित्र एवं महर्षि विश्वामित्र गुरु सम्मान

जगदलपुर/सोलन (हिमाचल प्रदेश)।
युवा एवं इको क्लब “दो कदम प्रकृति की ओर” तथा जूनियर रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़े शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ेमुरमा, बस्तर के पर्यावरण विशेषज्ञ मनीष कुमार अहीर को हिमाचल प्रदेश के सोलन में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में “पर्यावरण मित्र सम्मान” एवं “महर्षि विश्वामित्र गुरु सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता जागरूकता, शैक्षिक नवाचार तथा समाज एवं विद्यालय को जोड़ने के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ की 26 सदस्यीय टीम ने 6 जून से 12 जून 2026 तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, सोलन, रोहतांग दर्रा, अटल टनल तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का शैक्षणिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन भ्रमण किया। इस दौरान मनीष कुमार अहीर ने पूरी टीम का पर्यावरण विशेषज्ञ एवं मार्गदर्शक के रूप में नेतृत्व करते हुए हिमालयी पारिस्थितिकी, जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कराया।
यात्रा के दौरान टीम ने व्यास नदी के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन किया तथा रिवर राफ्टिंग के माध्यम से हिमालयी नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण और नदी जैव विविधता के महत्व को समझा। प्रतिभागियों ने जाना कि हिमालयी नदियाँ केवल पर्यटन का माध्यम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और कृषि की आधारशिला हैं।

कुल्लू-मनाली क्षेत्र में टीम ने देवदार, कैल, स्प्रूस तथा अन्य स्थानीय वनस्पतियों का अध्ययन किया। स्थानीय समुदायों से संवाद कर पर्वतीय कृषि, सेब बागवानी, जल संरक्षण प्रणालियों तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका को भी समझा।
रोहतांग दर्रा में हिमालय की बर्फीली पर्वत श्रृंखलाओं, ग्लेशियरों और उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का अवलोकन किया गया। यहाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, हिमनदों के पिघलने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष चर्चा हुई। वहीं अटल टनल के अध्ययन के माध्यम से आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य को समझने का अवसर मिला।
हिमाचल भ्रमण के उपरांत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), सोलन में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मनीष कुमार अहीर ने छत्तीसगढ़ टीम की ओर से अपने अध्ययन एवं अनुभवों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने पर्यावरण शिक्षा, विद्यालय आधारित इको क्लब गतिविधियों, जैव विविधता संरक्षण, विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने तथा स्थानीय समुदायों को पर्यावरण अभियानों से जोड़ने के सफल प्रयासों को साझा किया।
राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन शिक्षा, संस्कृति, समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित एक्टिव टीचर एंड स्टूडेंट ग्रुप के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों—बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश से चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा (डिप्टी डायरेक्टर, क्वालिटी एजुकेशन हिमाचल प्रदेश), राजकुमार (डिप्टी डीईओ सोलन), डीपीओ सोलन, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सोलन, डायट प्राचार्य सोलन, शिक्षाविद् गीतांजलि कश्यप तथा छत्तीसगढ़ से लखन लाल साहू सहित अनेक शिक्षा एवं समाजसेवा क्षेत्र के गणमान्यजन उपस्थित रहे।
मनीष कुमार अहीर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। विद्यालयों के इको क्लब, युवा समूह और रेडक्रॉस जैसी संस्थाएँ बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर एक हरित एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह सम्मान बस्तर क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है तथा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और नवाचारी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को नई प्रेरणा प्रदान करेगा।