Skip to content

Chhattisgarh High Court: बस्तर विवि के दैनिक वेतनभोगियों को राहत, 4 माह में निर्णय लेने का निर्देश

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court ने बस्तर विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़े अहम मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को 4 माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

10 साल से अधिक सेवा, फिर भी नियमितीकरण लंबित
मामले में 9 कर्मचारियों ने याचिका दायर कर बताया कि वे वर्ष 2009 से शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की थी, जिस पर पूर्व में भी कोर्ट ने विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को ध्यान में रखने के निर्देश
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि Supreme Court of India के हालिया फैसलों में 10 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके कर्मचारियों के नियमितीकरण पर जोर दिया गया है। हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा कि इन निर्णयों को ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार किया जाना जरूरी है।

नया अभ्यावेदन, 4 माह में निपटारा जरूरी
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि याचिकाकर्ता विस्तृत नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं, तो संबंधित प्राधिकारी उसे विधि अनुसार यथाशीघ्र, अधिकतम 4 माह के भीतर निपटाएं।

हजारों कर्मचारियों के लिए अहम संकेत
यह आदेश राज्य के उन हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है, जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।