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जगदलपुर के श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड में आयोजित भागवत कथा में विदुर चरित्र का वर्णन श्रद्धालु हुए मंत्र मुग्ध

जगदलपुर शहर के श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान कथावाचक सुबोध जी महाराज ने भक्तों को कथा सुनाते हुए भारतीय पौराणिक परंपरा के दो महान पात्रों विदुर और ध्रुव के जीवन प्रसंगों के माध्यम से गहन आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ये दोनों पात्र भले ही अलग-अलग युग और परिस्थितियों से जुड़े हों, लेकिन इनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। सुबोध महाराज ने बताया कि विदुर महाभारत काल के एक महान ज्ञानी, धर्मनिष्ठ और न्यायप्रिय सलाहकार थे।

उन्होंने जीवनभर सत्य का साथ दिया और कभी भी अन्याय के सामने झुकने का मार्ग नहीं अपनाया। हस्तिनापुर के प्रधान मंत्री के रूप में उन्होंने राजा धृतराष्ट्र को कई बार सही मार्ग दिखाने का प्रयास किया, लेकिन जब उनकी बातों को अनसुना किया गया, तो उन्होंने पद का त्याग कर दिया। यह उनके सिद्धांतों और आत्मसम्मान का प्रतीक था।
विदुर का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

महाराज ने उस प्रसंग का भी उल्लेख किया, जब भगवान श्रीकृष्ण उनके घर पहुंचे और उन्होंने प्रेमपूर्वक केले के छिलके ही परोस दिए। भगवान ने उस प्रेम को स्वीकार किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर को भौतिक वैभव नहीं, बल्कि सच्ची भावना और भक्ति प्रिय होती है।

भागवत कथा के आयोजन समिति की शुभ्रा दास ने बताया कि कथा का श्रवण करने जगदलपुर के हर वार्ड से श्रद्धालु आ रहे हैं । उन्होंने बताया कि जबलपुर से भी कुछ श्रद्धालु यहां कथा का श्रवण करने आ रहे हैं और उनके साथ ही साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण पहुंच रहे हैं ।