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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हिंदी साहित्य भारती बस्तर ने आयोजित की परिचर्चा और काव्य गोष्ठी, रचनाकारों ने साझा किए विचार और कविता

आज की नारी नया इतिहास लिख रही है – बलदाऊ राम साहू की अध्यक्षता में महिला सशक्तिकरण पर हुआ विस्तारपूर्ण संवाद

जगदलपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हिंदी साहित्य भारती बस्तर ने परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में बस्तर संभाग के कई रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने की।

अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में महिला सशक्तिकरण की समस्या और संभावनाओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान अत्यंत उच्च और पूजनीय रहा है। उन्होंने कहा, “आज का युग नारी पुनर्जागरण का है। आज की नारी नया इतिहास लिख रही है।”

रचनाकारों ने उठाए महिलाओं के शोषण और सशक्तिकरण के मुद्दे

कविता बिजोलिया ने कहा कि स्त्री को अक्सर इंसान नहीं बल्कि केवल स्त्री के रूप में देखा जाता है, जो चिंतनीय है। पूर्णिमा देहारी ने नारी की भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्त्रियाँ प्रश्न नहीं करती, इसलिए उनका शोषण होता है और उन्हें एकजुट होने की आवश्यकता है। एमन दास ने 21वीं सदी को महिलाओं के लिए उत्सव का समय बताते हुए कहा कि यह तिरस्कार और बहिष्कार का समय नहीं है।

काव्य पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ कार्यक्रम का रंगारंग समापन

परिचर्चा के पश्चात उपस्थित रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी साहित्य भारती के कुल-गीत के गायन से हुई। तत्पश्चात जगदलपुर की कवयित्री नवनीत कमल ने शारदे वंदना का गायन प्रस्तुत किया।

मुख्य रचनाकारों में डॉ. पूर्णिमा सरोज ने सफलता के लिए संघर्ष की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। रामचंद्र श्रीवास्तव, अर्चना श्रीवास्तव, शुची भवी, राकेश गुप्ता (दुर्ग), हेमंत मानिकपुरी, सतरूपा मिश्र, मनोज पाणिग्रही, नीता पांडे, भोजराज साहू, रानू शील नाग, रमा कश्यप, नेहा पाठक और ऋषभ देवांगन ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन नवनीत कमल ने किया। इस अवसर पर बस्तर के अलावा राज्य के विभिन्न जिलों से भी रचनाकारों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।