दिल्ली। छत्तीसगढ़ की सुदूर ग्रामीण इलाकों में छिपी कोसा रेशम बुनाई की पुरानी कला को अब नई पहचान मिली है। आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी हिंदाल्को ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में पहला प्रीमियम रिटेल स्टोर ‘कोसाला’ (Kosala) लॉन्च किया।
इस अवसर पर स्टोर का उद्घाटन श्रीमती राजश्री बिड़ला, चेयरपर्सन, आदित्य बिड़ला सेंटर फॉर कम्युनिटी इनिशिएटिव्स एंड रूरल डेवलपमेंट ने किया।
लुप्तप्राय कला को मिली नई पहचान
यह पहल साल 2021 में शुरू हुई थी, जब हिंदाल्को के प्रबंध निदेशक सतीश पाई और उनकी टीम ने रायगढ़ के देवांगन समुदाय की पारंपरिक कोसा रेशम कला को पहचाना। इसके बाद ‘कोसाला फाउंडेशन’ की स्थापना की गई। जंगली कोकून से रेशम निकालने की यह कला बेहद श्रमसाध्य है और धीरे-धीरे लुप्त हो रही थी।
हिंदाल्को के समर्थन से इस कला को आधुनिक डिजाइन और रंगों के साथ जोड़ा गया, जिससे बुनकरों की आय में 63 प्रतिशत तक वृद्धि हुई।
ग्रामीणों से अब युवाओं तक
इस पहल की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेंगलुरू में आईटी की नौकरी करने वाले बालेश्वर देवांगन जैसे युवा अब अपनी जड़ों की ओर लौटकर इस फाउंडेशन से जुड़ रहे हैं। महज 5 परिवारों से शुरू हुआ यह प्रयास अब रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जिलों के 700 से अधिक कारीगरों तक पहुंच चुका है।
स्टोर में पेश उत्पाद
दिल्ली स्टोर में पेस्टल रंगों की साड़ियाँ, कुर्ते और लैपटॉप बैग्स उपलब्ध हैं, जो वैश्विक फैशन मानकों को टक्कर दे रहे हैं। हिंदाल्को अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक स्टोर नहीं बल्कि एक रिवाइवल प्रोजेक्ट है, जो आने वाले समय में ऑनलाइन और अन्य शहरों में भी विस्तार करेगा।


