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केंद्र सरकार ने पेश किया”हम दो.हमारे दो”का बजट,बस्तर सहित छत्तीसगढ़ को ठगने वाला बजट –सुशील मौर्य

केंद्रीय बजट में किसान, युवाओं व मध्यम वर्ग के साथ अन्याय,कॉर्पोरेट हितों को साधने वाला है बजट

जगदलपुर । केंद्र सरकार द्वारा 2026 पेश किए गए केंद्रीय बजट पर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य ने प्रतिक्रिया दी है। केंद्र सरकार का यह बजट पूरी तरह निराशाजनक और दिशाहीन बजट है। इस बजट में न तो कृषि के लिए कोई ठोस प्रावधान है न ही युवाओं के रोजगार के लिए और न ही मध्यम वर्ग परिवार के लिए इस बजट में कुछ दिया गया है केंद्रीय बजट आज ग्यारह बार पेश किया गया है लेकिन इस बजट में सिर्फ उद्योगपतियों को मजबूती देने का कार्य किया गया है कुल मिलाकर केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह बजट”हम दो.हमारे दो”को लाभ पहुंचाने वाला बजट है।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं किए और न ही एक्साइज ड्यूटी घटाई, जबकि आम जनता इसकी उम्मीद कर रही थी। बजट आते ही शेयर बाजार गिर गया, क्योंकि न तो महंगाई कम हुई और न ही गरीब आदमी को कोई राहत मिली।सरकार ने शराब को महंगा और मछली को सस्ता कर दिया, लेकिन विकास की दिशा कहीं नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि मिडिल क्लास को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया।यह बजट एक बार फिर आम जनता,खासकर युवाओं को निराश करने वाला साबित हुआ है। बढ़ती महंगाई के दौर में आयकर में राहत न देना मध्यम वर्ग के साथ अन्याय है।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी नीतियां आम जनता के बजाय कॉर्पोरेट हितों को साधने वाली हैं।इस बजट में छत्तीसगढ़ के लिए कुछ भी नहीं है और यह राज्य को ठगने वाला बजट है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल भी सरकार ने दावा किया था कि, 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। इस बार भी वही बात दोहराई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में झूठ बोलने का काम किया है।केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ आदिवासी विश्विद्यालय बनाने का मुद्दा गायब रहा जो कि बड़ी ही निंदनीय है भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आदिवासी विश्विद्यालय बनाने का वादा किया था लेकिन इस बजट में छत्तीसगढ़ के बस्तर के लिए विशेष रूप से आदिवासी विश्वविद्यालय का उल्लेख न होना एक प्रमुख चिंता का विषय है, निराशाजनक है जो कि स्थानीय भाजपा नेताओं की निष्क्रियता को दर्शाता है।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा जो शिक्षा का बजट 4.5 प्रतिशत था उसे मोदी सरकार की केन्द्रीय बजट ने 2.5प्रतिशत कर दिया जहां उच्च शिक्षा का टोटल बजट 2.5प्रतिशत था उसे अब 0.9 प्रतिशत कर घटा दिया गया।वही केंद्रीय बजट में मनरेगा के लिए भी रुपयों की कटौती की गई है मनरेगा के लिए बजट आवंटन 2025-26 में 86,000 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 30,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

यह पिछले साल की राशि का करीब एक-तिहाई है.इसका मतलब है कि भाजपा सरकार की नई मनरेगा योजना वीबी-जी रैम जी को चलाने के लिए राज्यों  55,000 करोड़ रुपये से आने होंगे लेकिन शिक्षाकर्मियों को सैलरी देने में नाकाम यह छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के पास मनरेगा पैसा आएगा कैसे. कंगाली से जूझ रही सरकार इस योजना को कैसे चलाएगी।कुल मिलाकर शिक्षा के क्षेत्र में आया केंद्रीय बजट पूरी तरह से दिशाहीन बजट है।