सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कैथा में कथित सामाजिक बहिष्कार और अवैधानिक फरमान का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोग अपने निजी कानून चला रहे हैं, जबकि संविधान और कानून उनके सामने बेबस नजर आ रहे हैं।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बिलाईगढ़ पुलिस ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल बांड ओवर कर छोड़ दिया, जिससे अवैधानिक फरमान जारी करने वालों के हौसले और बढ़ गए हैं। गांव के मुखिया ईश्वर साहू, श्रीराम साहू, लोकेश साहू और अरुण साहू पर चुनावी रंजिश के चलते एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने, उनके खान-पान, लेन-देन और रोजगार पर रोक लगाने के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में यह भी आरोप है कि कौशल साहू से 185000 ,
विश्वनाथ साहू से 185000, चंदन साहू से 16000 और मुकुंद साहू से 3000 रुपये की अवैध वसूली की गई। वहीं गांव के शिक्षक मेंदराम साहू पर पीड़ित परिवार का साथ देने वालों को मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिस पर ग्रामीणों में आक्रोश है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष और गहन जांच करे तो कई और नाम सामने आ सकते हैं। पीड़ित पत्रकार ने अर्थदंड और ग्राम बहिष्कार से जुड़े वीडियो पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जमा करने की बात कही है, साथ ही हाईकोर्ट में भी आवेदन दायर किया गया है।
अब सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या जवाब देगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या फिर कैथा गांव पर ‘तालिबानी फरमान’ का ठप्पा और गहराएगा।

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