गुरुवार को नगर के काछन गुड़ी में बस्तर के विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना का दायित्व सम्हाल रहे पुजारियों और सेवादारों की बैठक आयोजित की गई । बैठक में विशेष रूप से सुकमा जमींदार और बस्तर धाकड़ ,क्षत्रिय , राजपूत समाज के संभागीय अध्यक्ष कुमार जयदेव शामिल हुए।
अवसर पर कुमार जयदेव ने कहा कि बस्तर में होने वाले मेले मड़ई और दशहरा जैसे पर्व में पुजारियों का विशेष महत्व होता है।लेकिन इस कार्यक्रमों के आयोजनों में इन्हें कोई महत्व नहीं दिया जाता।जबकि उड़ीसा और दक्षिण भारत में पुजारियों को विशेष सम्मान प्राप्त होता है।लेकिन बस्तर में दंतेश्वरी मंदिर,मावली मंदिर या अन्य माता गुड़ियों में। मंदिर का रखरखाव होता लेकिन पुजारियों का हाल बेहाल है।
पुजारियों की आर्थिक स्थिति खराब है किसी भी स्थिति में इन्हें सहयोग करने के लिए कोई नहीं है।
इसकी वजह से धीरे धीर बस्तर की संस्कृति पर छोटे पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि यदि पुजारी सक्षम नहीं होगा तो देवी देवताओं की सेवा कैसे होगी । उन्होंने कहा कि बस्तर के देवी देवताओं की विश्व में अनूठी पहचान है।उन्होंने काछन गुड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे बड़े आयोजन इसी जगह के आदेश से शुरू किए जाते हैं ।
उन्होंने जगदलपुर विधायक किरण देव की प्रशंसा करते हुए कहा कि किरण देव ने जिले के 186 मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की है। कुमार जयदेव ने कहा कि पर मुख्य विषय पुजारियों की आर्थिक स्थिति है उन्होंने कहा कि पुजारियों की मुख्य मांग मानदेय है जिसके लिए वह भटकते हैं।
कुमार जयदेव ने कहा पुजारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक संगठन निर्माण किया जा रहा है जिससे पुजारियों के लिए पैसे जुटाए जायेंगे जिससे किसी विपत्ति के समय पुजारी उस पैसे का उपयोग करे सकें । उन्होंने कहा कि पुजारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज की बैठक आयोजित की गई है।
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