बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय जनजातीय प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। विभिन्न विधाओं में जनजातीय कलाकारों, प्रतिभागियों एवं समूहों ने अपनी पारंपरिक कला, संस्कृति और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में जिले के अलग-अलग विकासखंडों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया।
जनजाति वाद्ययंत्र प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जगदलपुर, द्वितीय स्थान बकावंड तथा तृतीय स्थान बस्तर को प्राप्त हुआ।
जनजाति आभूषण प्रतियोगिता में दरभा के तेजेन्द्र कुमार कश्यप ने प्रथम, बकावंड की चंचला भारती ने द्वितीय और बस्तानार की सीमा मरकाम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जनजाति गीत प्रतियोगिता में बस्तानार की कुसुम एवं साथी (छेरका गीत) प्रथम, बकावंड के संतो पटेल (तीजा जगार) द्वितीय तथा दरभा के बीथो बघेल (धुरवा गीत) तृतीय स्थान पर रहे।
जनजाति वेशभूषा प्रतियोगिता में जगदलपुर की थवामणि भोयर ने प्रथम, दरभा के महादेव नाग एवं साथी ने द्वितीय तथा विकासखंड बस्तर की इक्षावती बघेल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जनजाति व्यंजन प्रतियोगिता में दरभा की हेमवती एवं साथी प्रथम, जगदलपुर की श्रीमती डुमेश्वरी माझी द्वितीय और बस्तर की श्रीमती फूलमती बघेल तृतीय स्थान पर रहीं।
जनजाति नृत्य प्रतियोगिता में धुरवा मड़ई नाचा (दरभा) ने प्रथम, गौर नृत्य (बस्तानार) ने द्वितीय तथा गेड़ी नृत्य (बस्तर) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जनजाति शिल्प कला प्रतियोगिता में जगदलपुर के शामनाथ नाग (बांस कला) प्रथम, दरभा के महादेव नाग (बांस कला) द्वितीय तथा तोकापाल के रघुनाथ सागर (घड़वा कला) तृतीय स्थान पर रहे।
जनजाति चित्रकला प्रतियोगिता में बस्तर के केशव लाल कश्यप ने प्रथम, जगदलपुर के मनोज बघेल ने द्वितीय और तोकापाल की गीतांजली नाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जनजाति पेय पदार्थ प्रतियोगिता में दरभा प्रथम, जगदलपुर द्वितीय तथा बस्तर तृतीय स्थान पर रहा।
जनजाति वन औषधि प्रतियोगिता में जगदलपुर के राजदेव बघेल प्रथम, लोहाड़ीगुड़ा के बद्रीनाथ कश्यप द्वितीय तथा तोकापाल के मनबोध सेडिया तृतीय स्थान पर रहे।
जनजाति आंचलिक साहित्य प्रतियोगिता में बस्तर के महेंद्र ठाकुर ने प्रथम, गंगाराम कश्यप ने द्वितीय और सभूँनाथ कश्यप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
जनजाति नाट्य प्रतियोगिता में बकावंड के नंदूराम एवं साथी प्रथम, बस्तर द्वितीय तथा तोकापाल तृतीय स्थान पर रहा।
बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं को सहेजने और प्रोत्साहित करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।


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