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विकास की हकीकत बेनकाब : राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों से छीना हक, कौवाडाही में दूषित पानी, भूखे बच्चे और भ्रष्टाचार का नंगा नाच!



धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार विकास के दावे भले ही मंचों से गरजकर किए जाते हों, लेकिन धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित मुहल्ला कौवाडाही इन दावों पर करारा तमाचा है। यहां विकास नहीं, बल्कि उपेक्षा, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संवेदनहीनता की बदबू फैली हुई है।

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा समुदाय के लगभग 12–15 परिवार आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। जिनके नाम पर योजनाएं बनाई जाती हैं, उन्हीं से सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और राशन तक छीन लिया गया है। सवाल यह है कि आखिर उनके हिस्से का विकास कौन डकार रहा है?

योजनाओं की लूट, प्रशासन मौन
बता दें, कि ग्रामीण विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बातें की जाती हैं, लेकिन कौवाडाही में यह राशि भ्रष्टाचारियों की जेब में जाती दिखाई दे रही है। और वहीं अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से योजनाओं की खुली लूट हो रही है और स्थानीय प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदे बैठा है।

स्कूल मरम्मत में लाखों का घोटाला, बच्चों की जान से खिलवाड़
मिली जानकारी अनुसार पहाड़ी कोरवा बच्चों के भविष्य को संवारने के नाम पर स्कूल भवन मरम्मत के लिए शासन द्वारा जारी किए गए राशि में से 2 लाख 96 हजार 950 रुपये पंचायत जनप्रतिनिधि एवं सचिव द्वारा आहरण किए गए, लेकिन स्कूल आज भी जर्जर हालत में खड़ा है। मरम्मत के नाम पर पैसा हड़प लिया गया और स्कूल को आंगनबाड़ी में ठूंस दिया गया।

और वहीं मजेदार बात स्कूल में दो शिक्षकों की पदस्थापना के बावजूद एक शिक्षक धरमजयगढ़ में आराम फरमाते हैं। दो माह से मध्यान भोजन बंद है। बच्चों को न भोजन मिल रहा है, न शुद्ध पानी। वर्षों से खराब पड़ा हैंडपंप प्रशासन की नाक के नीचे जंग खा रहा है। क्या जिम्मेदार किसी बड़ी बीमारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं?



सड़क नहीं, पगडंडी; सुविधा नहीं, मजबूरी
वहीं कौवाडाही तक आज तक आवागमन के लिए सड़क नहीं बन पाई। ग्रामीणों के अनुसार बरसात में उफनता नाला ग्रामीणों की राह रोक देता है। कई बार लोगों को घंटों या रात भर नाले के उस पार फंसे रहना पड़ता है। नाला पार करने के बाद भी पगडंडी के सहारे गांव पहुंचना पड़ता है। यही है सरकार का “ग्रामीण विकास”?

राशन में भी डाका, गरीबों का निवाला गायब
बता दें,शुद्ध पानी के साथ-साथ राशन भी कौवाडाही वासियों के लिए सपना बन चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन सही मात्रा में नहीं दिया जाता, एक माह का राशन तो पूरी तरह गायब है। पहाड़ी कोरवा समुदाय का हक भी राशन माफियाओं ने डकार लिया है। वहीं वर्तमान छत्तर सिंह राठिया सरपंच का आरोप पुराने सरपंच पर है, तो मध्यान भोजन के चावल के लिए शिक्षक पर जिम्मेदारी डाल दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि दोषियों पर कार्रवाई कौन करेगा?

बहरहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को आखिर कब उनका अधिकार मिलेगा?
कब भ्रष्टाचारियों पर गाज गिरेगी? और कब कौवाडाही को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा?