जब जर्रे जर्रे के भीतर में कमीशनखोरी और निवछावरखोरी व्याप्त हो, तो फिर काहे का भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर झूठा जूमला। पंचायत स्तर से लेकर हर स्तर पर आज भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है। बावजूद इसके हम सिर्फ भ्रष्टाचार पर भाषणबाजी करना पंसद करते है
विकास की टूटती हुई हर मंजर, किसी सपनों के टूट जाने से कम नही होता है। यकीन ना हो तो जाकर देखो रे, ऐ रहनूमाओ, नारागांव और बडहूम वाली सडक पर कसम उडान छल्ले की चलने का मन नही होता है
विनोद नेताम/ बालोद : जिला के संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र के भीतर में मौजूद वनांचल क्षेत्र की ज्यादातर सडके विकास की अधूरा पैमाना गढे जाने को लेकर इन दिनो मायुस होकर टूट कर बिखरने लगी है,जबकि वँनाचल क्षेत्रों में विकास की हर अधूरा पैमाना को पूरा भरने का काम और नैतिक जिम्मेदारी शासन और प्रशासन ने सरकार के आदेश पर पहले ही तय कर रखी हुई है।
अब सवाल यह उठता है कि बालोद जिला प्रशासन ने वँनाचल क्षेत्र के भीतर में मौजूद सडको के लिये जिन पर जिम्मेदारी तय कर रखी है आखिरकार वह नैतिकता के जिम्मेदार सख्त कंहा है? आखिरकार जिम्मेदार सख्त की नैतिकता टूटती और बिखरती हुई सडको को देखर कंहा छूप गया है। ज्ञात हो कि वनांचल क्षेत्र के भीतर में गुजरने वाली गुरूर,बडहूम वाह्या सियादेवी, नारागांव वाली सडक है जंहा पर कई गांव के लोग आना जाना रोजाना करते है।
जरा सोचिये क्या वँनाचल क्षेत्र के ग्रामीणों को उन्नत और बढिया सडक पाने का अधिकार नही है? आखिरकार उन्होंने ने भी तो सरकार को चुनाव में वोट दिया था फिर उनके साथ सडक को लेकर नाइंसाफी क्यों? शासन, प्रसासन व सरकार को वनांचल के भीतर से उठने वाली अवाज को गंभीरता के साथ सुनना व समझना चाहिए क्योंकि वनांचल क्षेत्र आज भी कई मायनो में किसी दूसरे जगह से पिछडा हुआ है और सडक आवागमन का मुख्य संसाधन होता है।


