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अनुभव सिन्हा की ‘अस्सी’ रिलीज, संवेदनशील मुद्दे पर आधारित फिल्म

निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। देश में होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चाओं में रही है। शुरुआत में लोगों को लगा था कि यह फिल्म वाराणसी के अस्सी घाट की कहानी पर आधारित होगी, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि इसकी कहानी एक गंभीर और संवेदनशील सामाजिक मुद्दे से प्रेरित है।

निर्देशक का कहना है कि फिल्म का मूल विचार समाचार पत्रों की सुर्खियों से आया है। उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में जरूरी विमर्श खड़ा करना है।


बॉक्स ऑफिस आंकड़े गपशप का विषय

अनुभव सिन्हा ने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और स्टार रेटिंग की संस्कृति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े अक्सर चर्चा को केवल संख्याओं तक सीमित कर देते हैं, जबकि असली मुद्दा कहीं अधिक गंभीर होता है।

उन्होंने कहा कि दर्शकों को अक्सर यह समझ नहीं आता कि ‘भारत में कुल कमाई’, ‘भारत में शुद्ध कमाई’ और ‘विश्व स्तर पर कुल कमाई’ में क्या अंतर होता है। निर्माता को घोषित रकम का 50 प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिलता है, जबकि 400, 700 या 800 करोड़ जैसे आंकड़े केवल महत्वाकांक्षी प्रतीत होते हैं।

उनका कहना है कि यदि संभव होता तो वे अपने बॉक्स ऑफिस आंकड़े घोषित ही नहीं करते, चाहे वे अच्छे हों या बुरे।


छोटे शहरों में भी देखी जाएंगी ऐसी फिल्में

अनुभव सिन्हा का मानना है कि ‘अस्सी’ जैसी फिल्में केवल महानगरों के लिए नहीं होतीं। अपने जमीनी अभियान ‘चल सिनेमा चलें’ के तहत उन्होंने भारत के 40 दूसरे दर्जे के शहरों का दौरा किया।

उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि छोटे शहरों के दर्शक केवल बड़े बजट की फिल्में देखते हैं। वे ऐसी गंभीर फिल्मों में भी रुचि रखते हैं, बशर्ते उन्हें सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए। पिछले दो महीनों से टीम छोटे शहरों में घर-घर जाकर फिल्म का प्रचार कर रही है।


बॉक्स ऑफिस पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

निर्देशक का कहना है कि ‘अस्सी’ उनके इस दौर की सबसे कमर्शियल फिल्म है। यह तेज रफ्तार और नाटकीय मोड़ों से भरपूर है। खासकर अदालत के दृश्य दर्शकों को बहस और तर्क की प्रक्रिया से जोड़ते हैं, जहां वे खुद भी न्याय का मूल्यांकन करने लगते हैं।


कोर्टरूम की वास्तविकता से सामना

कोर्टरूम सीन की तैयारी को लेकर अनुभव ने बताया कि उनकी दो वरिष्ठ महिला वकील मित्रों ने उन्हें वास्तविक अदालत का अनुभव लेने की सलाह दी। उन्होंने नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट का दौरा किया, जहां का माहौल देखकर वे चौंक गए।

उन्होंने स्वीकार किया कि पहले वे अदालतों को अपेक्षाकृत शांत और व्यवस्थित रूप में दिखाते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक भीड़भाड़ और जटिल है। इस अनुभव ने उन्हें फिल्म में कोर्टरूम के दृश्यों को अधिक यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद की।

‘अस्सी’ के जरिए अनुभव सिन्हा एक बार फिर सामाजिक मुद्दे पर गंभीर बहस छेड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना यह है कि दर्शक इसे किस तरह स्वीकार करते हैं।