बजट में घोषित सीमा शुल्क संशोधन पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क संशोधन का अमेरिकी टैरिफ से कोई लेना-देना नहीं है। यह प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से चल रही है और इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना है।
अमेरिकी टैरिफ से जोड़ने की अटकलों पर विराम
राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का बजट प्रस्तावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का कोई अलग आकलन भी नहीं किया, क्योंकि बजट में किए गए संशोधन भारत की आंतरिक आर्थिक जरूरतों पर आधारित हैं।
दो साल से चल रही टैरिफ रेशनलाइजेशन प्रक्रिया
सीतारमण ने बताया कि सीमा शुल्क ढांचे को सरल, संतुलित और उद्योग-अनुकूल बनाने की प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से चल रही है। इसका मकसद
शुल्क असंतुलन को दूर करना
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना
निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करना
है, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव का जवाब देना।
किन क्षेत्रों को मिला सीधा फायदा
वित्त मंत्री के अनुसार, बजट 2026-27 में जिन क्षेत्रों में शुल्क संशोधन किया गया है, उनमें शामिल हैं—
समुद्री, चमड़ा और वस्त्र उद्योग
ऊर्जा क्षेत्र
महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में उपयोग होने वाली पूंजीगत वस्तुएं
नागरिक और प्रशिक्षण विमानों के निर्माण से जुड़े पुर्जे
17 आवश्यक दवाएं
इन क्षेत्रों को राहत देकर ‘मेक इन इंडिया’ को लागत और प्रतिस्पर्धा दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई गई है।
भविष्य के लिए नया रोडमैप
बैंकिंग सेक्टर पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय बैंक आज मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता की स्थिति में हैं, लेकिन सरकार यहीं रुकना नहीं चाहती।
उन्होंने बताया कि बजट 2026 में घोषित उच्च स्तरीय समिति बैंक समेकन और भविष्य की बैंकिंग संरचना पर विचार करेगी। समिति के कार्य-क्षेत्र (Terms of Reference) का मसौदा शीघ्र तैयार किया जाएगा।
विनिवेश प्रक्रिया पर भी संकेत
सीतारमण ने याद दिलाया कि मई 2021 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। सरकार बैंकिंग सुधारों को दीर्घकालिक और संरचनात्मक दृष्टि से आगे बढ़ा रही है।
आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा
वित्त मंत्री का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि बजट 2026-27 की टैक्स नीति किसी बाहरी दबाव की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर औद्योगिक रणनीति का हिस्सा है, जहां शुल्क नीति को विकास का औजार बनाया जा रहा है।



