जांजगीर-चांपा। क्या एक साधारण-सा डायपर किसी नवजात के लिए जीवनरक्षक बन सकता है? छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से सामने आई यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना न सिर्फ इंसान को भावुक करती है, बल्कि विज्ञान को भी हैरान कर देती है।
जांजगीर के सिवनी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब दोपहर के समय एक खूंखार बंदर ने सुनीता राठौर की गोद से उनकी महज 20 दिन की मासूम बच्ची को झपट लिया। अचानक हुई इस घटना से गांव में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीण कुछ समझ पाते, इससे पहले ही बंदर बच्ची को लेकर लगभग 20 फीट गहरे कुएं की मुंडेर पर जा पहुंचा।
ग्रामीणों ने पटाखे फोड़े, शोर मचाया, लेकिन तभी सबसे भयावह दृश्य सामने आया—बंदर ने मासूम को सीधे कुएं में फेंक दिया। पल भर में सन्नाटा छा गया। सभी को लगा कि इतनी छोटी बच्ची पानी में डूब गई होगी, लेकिन तभी कुएं के भीतर जो नजारा दिखा, उसने सबको चौंका दिया।
मासूम बच्ची पानी में डूबी नहीं, बल्कि किसी नाव की तरह तैरती रही। इसकी वजह बना उसका डायपर। डायपर में मौजूद ‘सुपर एब्जॉर्बेंट मटीरियल’ ने हवा को संजोए रखा और वह बच्ची के लिए लाइफ जैकेट की तरह काम करने लगा।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए बाल्टी और रस्सी की मदद से बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला। लगभग 10 मिनट तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मासूम को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है।
इस चमत्कारिक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया—
“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।”
बाइट – लोकेश राठौर, बच्ची के पिता
“जब बच्ची कुएं में गिरी तो हमें लगा सब खत्म हो गया… लेकिन भगवान ने हमारी बच्ची को बचा लिया।”
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