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बस्तर के खेतों में आधुनिक कृषि यंत्रों ने बदली तस्वीर

उन्नत यंत्रों से खेती की तस्वीर बदल रहे किसान, लागत घटी और मुनाफा बढ़ा

जगदलपुर, 22 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल बस्तर जिला अब उन्नत कृषि का नया अध्याय लिख रहा है। यहाँ के किसान पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। कृषि अभियांत्रिकी द्वारा शासकीय दरों पर किराए पर उपलब्ध कराए जा रहे बेलर, रोटावेटर और सीड ड्रिल जैसे आधुनिक यंत्रों ने न केवल किसानों की मेहनत कम की है, बल्कि खेती की लागत घटाकर मुनाफे का नया रास्ता भी खोल दिया है। अब यहां के किसान इन उन्नत कृषि यंत्रों से जुताई, रोपा, कटाई, मिंजाई सहित अन्य कार्यों के लिए ज्यादातर कर रहे हैं।

जिले में सबसे सकारात्मक बदलाव फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देखने को मिला है। धान की कटाई के बाद अक्सर किसान जिस पैरा (पराली) को खेत में ही जला देते थे, जिससे भारी प्रदूषण होता था, अब उसी अवशेष को स्ट्रॉ बेलर मशीन ने कमाई का जरिया बना दिया है। जगदलपुर, लोहण्डीगुड़ा और बस्तर विकासखंडों में इस मशीन के जरिए महज 303 घंटों में 7500 पैरा बंडल तैयार किए गए हैं। ग्राम बस्तर के किसान वैद्यनाथ सेठिया बताते हैं कि बेलर मशीन के उपयोग से बंडल बनाना बेहद सस्ता पड़ता है और इसके परिवहन व भंडारण में आसानी होती है।

अब किसान पैरा जलाने के बजाय उसका उपयोग पशु चारे और मशरूम उत्पादन में कर रहे हैं। दूसरी ओर रबी फसल की तैयारियों में रोटावेटर मशीन ने एक क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। चिलकुटी और बिलोरी जैसे गांवों में इसका व्यापक असर दिख रहा है।

जहां पारंपरिक हल से खेत तैयार करने के लिए किसानों को तीन से चार बार जुताई करनी पड़ती थी, वहीं रोटावेटर एक ही बार में मिट्टी को भुरभुरा बना देता है। कृषक पवन देवांगन के अनुसार इससे न केवल समय की भारी बचत हो रही है, बल्कि खेत में मौजूद फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं, जो प्राकृतिक खाद बनकर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।

बुवाई की तकनीक में भी बस्तर के किसानों ने मल्टीक्रॉप सीड ड्रिल और प्लांटर को अपनाकर एक नई मिसाल पेश की है। धान, मक्का और अन्य फसलों की कतार में बुवाई के लिए किसान अब इन मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। कुम्हली के किसान दुर्गा प्रसाद जोशी का अनुभव है कि मशीन से बुवाई करने पर बीज की बर्बादी रुकती है और गहराई एकदम सटीक रहती है, जिससे मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

कृषि अभियंता श्री एचएल देवांगन ने बताया कि जिले के किसान अब जुताई से लेकर मिंजाई तक पूरी प्रक्रिया में मशीनीकरण को अपना रहे हैं। साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन के लिए भी इन उन्नत यंत्रों का सदुपयोग कर रहे हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों का यह बढ़ता प्रयोग यह साबित करता है कि बस्तर के किसान अब खेती-किसानी को लाभकारी बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा चुके हैं, जिससे न केवल लागत घट रही है बल्कि पैदावार में भी आशातीत बढ़ोतरी हो रही है।